डीएनबी भारत डेस्क
बछवाड़ा प्रखंड कार्यालय में पिछले काफी समय से सुलग रही असंतोष की आग अब खुलकर सामने आ गई है। पंचायत समिति सदस्यों ने वर्तमान प्रखंड प्रमुख के कार्यशैली में मनमानी और सदस्यों की उपेक्षा करने का गंभीर आरोप लगाते हुए अविश्वास प्रस्ताव का आवेदन अंचलाधिकारी को सौंपा है। बताते चले कि बछवाड़ा प्रखंड में कुल 24 पंचायत समिति सदस्य में 22 पंचायत समिति सदस्य हैं।

इनमें से 8 सदस्यों ने एकजुट होकर प्रखंड प्रमुख सुधाकर मेहता के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए हैं। असंतुष्ट सदस्यों में पूर्व प्रमुख राधा देवी,मिथलेश कुमार यादव,कामनी कुमारी,मंचन कुमारी,प्रमीला देवी,पूनम कुमारी,अंगूरी खातून,सिकंदर कुमार का कहना है कि प्रमुख अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर रहे हैं और विकास योजनाओं के चयन में पारदर्शिता नहीं बरती जा रही है। सदस्यों ने आरोप लगाया कि प्रखंड क्षेत्र में होने वाले विकास कार्यों में उनकी राय नहीं ली जाती और प्रमुख केवल अपनी मर्जी से फैसले ले रहे हैं।
पंचायत समिति की बैठक किये बिना अपनी मर्जी से कुछ विशेष और चुनिन्दा क्षेत्रो में लाईट लगवाया गया पंचायत समिति की बैठक स समय नहीं बुलाया गया,प्रखंड पंचायत समिति बछवाड़ा की बैठक में लिए गये निर्णय का अनुपालन नहीं करना और अपनी मर्जी से योजना का बंदर बाँट करते हुए भ्रष्टाचार के साथ धांधली करना,उपसमितियों का बैठक कभी नहीं करना और पंद्रहवी षष्टम वित्त आयोग योजनाओ को छोड़कर अन्य किसी विभागों पर कोई अंकुश नहीं होना और कनीय अभियान्याओ द्वारा बनाये गए प्रकलन पर कुछ विशेष सदस्यों को छोड़कर अन्य समितियों के क्षेत्रो के प्रकलित राशि को जन बुझकर कम करना,
और योजनाओ के पूर्ण होने के पश्चात् भुगतान सा समय नहीं करना,ज्यादातर समिति मद की राशि का खर्च निजी कारणों से प्रखंड स्तर पर जानबूझ कर करना आदि कारणों से छुब्ध होकर पंचायत समिति सदस्यों ने प्रखंड प्रमुख पर अविश्वास प्रस्ताव लगाया है। अविश्वास प्रस्ताव की सूचना मिलते ही प्रखंड मुख्यालय में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। नियमों के मुताबिक, अब संबंधित प्रशासनिक पदाधिकारी इस प्रस्ताव पर चर्चा और मतदान के लिए एक विशेष तिथि निर्धारित करेंगे।
निर्धारित तिथि पर सदन की बैठक बुलाई जाएगी, जहां वर्तमान प्रमुख को अपना बहुमत सिद्ध करना होगा। यदि प्रमुख बहुमत साबित करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें अपने पद से हाथ धोना पड़ सकता है। प्रमुख खेमा भी अपनी कुर्सी बचाने के लिए जोड़-तोड़ की राजनीति में जुट गया है। क्षेत्र के लोगों की निगाहें अब प्रशासन द्वारा तय की जाने वाली उस तारीख पर टिकी हैं, जो बछवाड़ा प्रखंड की नई राजनीतिक दिशा तय करेगी।
डीएनबी भारत डेस्क