डीएनबी भारत डेस्क
खगड़िया जिले के परबत्ता प्रखंड स्थित नयागांव पंचखुट्टी गांव में महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर वितरित प्रसाद के सेवन से फूड प्वाइजनिंग का गंभीर मामला सामने आया है। घटना के बाद पूरे गांव में हड़कंप मच गया। दूध और भांग से बने प्रसाद को ग्रहण करने के बाद 100 से अधिक बच्चे, महिलाएं और बुजुर्ग अचानक बीमार पड़ गए। सभी में उल्टी, दस्त, पेट दर्द, चक्कर और कमजोरी जैसे लक्षण पाए गए।

पूजा-अर्चना के बाद बांटा गया था प्रसाद
ग्रामीणों के अनुसार सोमवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर गांव के काली मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना और भजन-कीर्तन का आयोजन किया गया था। देर शाम श्रद्धालुओं के बीच दूध और भांग से बना प्रसाद वितरित किया गया। शुरुआत में सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन देर रात कुछ बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें उल्टी-दस्त की शिकायत हुई। देखते ही देखते मंगलवार सुबह तक कई अन्य लोग भी समान लक्षणों से पीड़ित हो गए। बुधवार तक बीमार लोगों की संख्या 100 से अधिक पहुंच गई।
एक साथ इतने लोगों के बीमार होने से मची अफरातफरी
एक साथ बड़ी संख्या में लोगों के बीमार पड़ने से गांव में अफरातफरी का माहौल बन गया। परिजनों ने पहले घरेलू उपचार का सहारा लिया, लेकिन हालत बिगड़ती देख तत्काल जनप्रतिनिधियों और स्वास्थ्य विभाग को सूचना दी गई। दरियापुर भेलवा पंचायत के मुखिया राम विनय कुमार ने तुरंत परबत्ता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को मामले की जानकारी दी।
स्वास्थ्य विभाग की टीम मौके पर पहुंची
सूचना मिलते ही चिकित्सा प्रभारी डॉ. कशिश के नेतृत्व में मेडिकल टीम गांव पहुंची। स्वास्थ्य विभाग ने काली मंदिर परिसर में ही अस्थायी स्वास्थ्य शिविर स्थापित कर दिया। डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने पीड़ितों की जांच कर उन्हें ओआरएस, एंटीबायोटिक और अन्य आवश्यक दवाएं दीं। कई बच्चों को निर्जलीकरण की स्थिति में पाया गया, जिन्हें तत्काल प्राथमिक उपचार दिया गया। गंभीर लक्षण वाले कुछ बच्चों को बेहतर इलाज के लिए परबत्ता सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया।
प्रारंभिक जांच में फूड प्वाइजनिंग की पुष्टि
चिकित्सकों ने सभी मरीजों में समान लक्षण पाए। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई गई कि दूध और भांग से बने प्रसाद के दूषित होने या अधिक समय तक खुले में रखे रहने के कारण फूड प्वाइजनिंग हुई। स्वास्थ्य विभाग ने प्रसाद के नमूने की जांच की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है, ताकि सटीक कारण का पता लगाया जा सके।
कई बच्चे और महिलाएं हुईं प्रभावित
बीमार होने वालों में 11 वर्षीय अंकू कुमार (पिता जयकांत सिंह), 14 वर्षीय मोहित कुमार (पिता संजीत ठाकुर), अंकित कुमार, कृष्णा कुमार, फूलन देवी, रूबी देवी, मनोज ठाकुर, जयकांत सिंह, आदर्श कुमार, ब्यूटी कुमारी, जहरी देवी, अनुसा कुमारी, दिनेश मंडल सहित कई अन्य ग्रामीण शामिल हैं। अधिकांश मरीजों को मौके पर ही उपचार देकर घर भेज दिया गया।
सभी की हालत अब सामान्य
चिकित्सा प्रभारी डॉ. कशिश ने बताया कि सूचना मिलते ही स्वास्थ्य विभाग सक्रिय हो गया था। “लगभग 100 से अधिक लोग प्रभावित हुए थे। सभी मरीजों का मौके पर या अस्पताल में इलाज किया गया है। फिलहाल सभी की स्थिति सामान्य है और कोई भी खतरे से बाहर है।” उन्होंने बताया कि एहतियातन गांव में स्वास्थ्य विभाग की टीम निगरानी बनाए हुए है।
प्रशासन ने की सावधानी बरतने की अपील
स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन ने ग्रामीणों से अपील की है कि धार्मिक आयोजनों या सामूहिक कार्यक्रमों में प्रसाद एवं भोजन तैयार करते समय स्वच्छता और खाद्य सामग्री की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें। खासकर दूध और भांग जैसे संवेदनशील पदार्थों का उपयोग करते समय उन्हें ताजा और स्वच्छ वातावरण में तैयार करना जरूरी है।
फिलहाल गांव में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन इस घटना ने धार्मिक आयोजनों में खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खगड़िया संवाददाता राजीव कुमार की रिपोर्ट