वोट जाति और धर्म पर, तो अपराध भी झेलना होगा”: नीतीश सरकार के साथ-साथ जनता पर भी बरसे पीके
डीएनबी भारत डेस्क

जनसुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार मे शराबबंदी और बढ़ रहे अपराध पर एन डी ए सरकार पर जमकर हमला बोला है। इतना ही नहीं प्रशांत किशोर ने एन डी ए की सरकार को चुनने पर जनता को भी खूब खड़ी खोटी सुनाई है।
प्रशांत किशोर ने कहाँ की अगर शराब बंदी से महिलाओ का शस्कतीकरण हो रहा है तो इसे पुरे देश मे लागू करना चाहिए। उन्होंने अपराध के मुद्दे पर जनता को आईना दिखाते हुए कहाँ की अगर जनता बबूर बोयेगी तो वो आम कहाँ से खायेगी। बताते चले की कार्यकर्ता संबाद कार्यक्रम के तहत मंगलवार को जनसुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर बेगूसराय के हरपुर पहुंचे। इस दौरान कार्यकर्ताओ ने उनका भब्व स्वागत किया।
इस दौरान मिडिया को सम्बोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा की जनसुराज ने तीन सालो तक रणनीति बनाकर काम किया। जनता ने लगभग उनको 18 लाख वोट देकर जनता की सेवा के लिए चुना,ना की बिहार छोड़ कर जाने के लिए कहा। जनता के आदेश का वो पालन कर रहे है और जनता के बीच जाकर उनके समस्या के समधान पर काम कर रहे है।जनता ने एनडीए को सत्ता सौंपा शासन चलाने के लिए जबकि राजद को बिपक्ष मे बैठने के लिए चुना है जबकि जनसुराज के लोग सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर मिलकर जनता का काम करेंगे।
जिसपर वो काम कर रहे है ताकि जनसुराज समाज की आवाज़ बन सके। प्रशांत किशोर ने कहा की पिछले तीन सालो मे जनसुराज मे एक ही बात समझाई जा रही है की जो बोओगे वही काटोगे। अगर आप NDA को चुनेंगे तो सरकार NDA के एजेंडा पर ही चलेगा। NDA का एजेंडा क्लियर है वो पूरा देश देख रहा है। प्रशांत किशोर ने शराब बंदी पर कहा ही अगर बिहार मे शराबबंदी से महिलाओ का सशक्तिकरण हो रहा है तो इसे यूपी और पुरे देश मे लागू किया जाय। उन्होंने आगे कहाँ की अगर ये इतना ही अच्छा स्कीम है जिसमें महिलाओं का सशक्तिकरण हो रहा है तो फिर यह सिर्फ बिहार की महिलाओं के लिए ही क्यों देश की महिलाओं के लिए क्यों बंचित किया जा रहा है।
प्रशांत किशोर ने कहाँ की केंद्र, दिल्ली बिहार यूपी मे एन डी ए की सरकार है तो मोदी जी पुरे देश मे शराबबंदी लागू कर देना चाहिए। वही प्रशांत किशोर ने बिहार मे लॉ एंड ऑर्डर पर सवाल खड़ा करते हुए कहाँ की बिहार में पिछले कई सालों से लॉ इन ऑर्डर की स्थिति बनी हुई है लेकिन जनता ने एक बार फिर से NDA को बहुमत दिया है। तो निश्चित तौर में तौर पर जनता को उसमें सुधार की संभावना को नहीं देखना चाहिए।बिहार मे हुए अपराध के खिलाफ जनसुराज आवाज़ उठा रही है।प्रशांत किशोर ने नींट छात्रा मौत के मामले मे कहाँ की पुलिस ने सबसे पहले इस को आत्महत्या करार दे दिया इसे हत्या मानने से इंकार कर दिया।
इस मामले मे जनसूराज की ओर से मै जब पीड़िता के परिजनों से मिला तब जाकर सरकार की नींद जागी और तब जाकर एस आईटी का गठन किया गया।जिसके बाद दो पुलिस पदाधिकारी स्सपेंड हुए। जनसूराज की कोशिश होती है की बिहार मे कही भी होने वाले जघन्य अपराध पर वहाँ जाये और पीड़ित की आवाज़ बन सके। लेकिन जनता ने उसी पुरानी बैबस्था को चुना। वो जनता से ये कहना चाहते है की आप बबुल बोएंगे तो आम नहीं खा सकते है।उन्होने आगे कहाँ की स्थिति बदलनी है तो लोगो को बदलना होगा। अगर बिहार के लोगो ने दस हजार की लालच, जाती के नाम पर या हिन्दू मुस्लिम के नाम पर वोट दिया है तो आपको पांच साल तक इस बैबस्था को झेलना पड़ेगा।
डीएनबी भारत डेस्क