गन्ना किसानों में भरोसा,सुविधा और लाभ देने में सरकार विफल रही – अशोक
किसान महापंचायत ने गन्ना मंत्री का पुतला जलाने का लिया निर्णय,अध्यक्ष किसान मोर्चा
34 नये चीनी मिल के लिए 8 लाख हेक्टे में गन्ना खेती सरकार के समक्ष एक बड़ी चुनौती-अशोक
डीएनबी भारत डेस्क
बेगूसराय/हसनपुर चीनी मिल क्षेत्र में मालीपुर दुर्गा स्थान में आयोजित किसान महापंचायत की अध्यक्षता कोरैय पैक्स अध्यक्ष चंदन जी तथा मंच संचालन धर्मेन्द्र प्रसाद सिंह ने की।महापंचायत को संबोधित करते हुए बिहार राज्य गन्ना किसान मोर्चा के अध्यक्ष अशोक प्रसाद सिंह ने कहा की 25 नई और 9 पुराने चीनी मिलों को चालू करने की सरकारी घोषणा से किसानों के बीच खुशी की लहर दौड़ी।

मगर इसके लिए बिहार में कम से कम 8 लाख हेक्टेयर में गन्ना की खेती आज एक बड़ी चुनौती है।अभी बिहार में 2.37 लाख हेक्टेयर में ही गन्ना की खेती हो रही है।चीनी मिल के साथ एथनॉल,बिजली, खाद,शीरा,कागज,कूट,अल्कोहल एवं जलावन आदि का कारखाना खुलेंगे।मगर विडंबना यह है कि बिहार के गन्ना किसान सबसे ज्यादा शोषित और अपेक्षित हैं।देश-विदेश में सबसे कम गन्ना मूल्य बिहार में है।गन्ना उत्पादकों के बीच सरकार के प्रति काफी आक्रोश है।मिल मालिकों के सामने सरकार ने घुटना टेक दिया।यदि चीनी उद्योग को सचमुच में सरकार विकसित करना चाहती है,तो गन्ना उत्पादकों की समस्याओं पर गंभीरतापूर्वक विचार करना होगा।
मगर किसान प्रतिनिधियों से मिलने के बजाए मंत्री दिन भर मिल मालिकों से घिरे रहते है।किसानों के मनोबल को उठाने, भरोसा और विश्वास पैदा करने के लिए उनके मांगों की पूर्ति करें। यदि किसानों में सरकार के प्रति भरोसा पैदा नहीं हुआ,तो सरकारी निर्णय ख्याली-पुलाव बनकर रह जाएंगे।नये चीनी मिल खोलने की बात तो दूर रही,चालू चीनी मिले भी बंद हो जाएगें।गन्ने की खेती सिकुड़ता जा रहा है। किसानों को प्रोत्साहित करने हेतु सरकार को अविलंब उचित कदम उठाना होगा। सरकारी उपेक्षा और मिल प्रबंधन की मनमानी के चलते धीरे-धीरे किसान गन्ना की खेती छोड़कर अन्य फसलों की ओर भाग रहे है।
1904 से लेकर 1940 के बीच बिहार में 33 चीनी मिले खुली।बिहार देश में सबसे बड़ा चीनी उत्पादक था।तबबिहारी चीनी लंदन में मशहूर थी।बिहार राज्य चीनी निगम की लूट खसोट एवं मिल प्रबंधन की मनमानी के चलते 1980 से 2005 के बीच 18 चीनी मिले बंद हो गई।आज मात्र 10 चीनी मिले बिहार में चल रही है।जिसमें 64500 टन गन्ना की रोज पेराई हो रही है। मिलों को पर्याप्त गन्ना नहीं मिल रही है या तो पेराई सत्र को छोटा कर या कम क्षमता पर मिले चल रही हैं। सिर्फ जुवानी जमा खर्च पर सरकार गन्ना खेती का विकास एवं विस्तार करना चाहती है।कम से कम 800 रु प्रति क्विं गन्ना का दाम तय हो,तत्काल प्रति क्विंटल गन्ना पर 100रु किसानों को बोनस मिले।किसानों को मुफ्त में उन्नत किस्म का बीज,सस्ते दर पर खाद,कीटनाशक एवं सिंचाई की सुविधा के साथ तकनीकी मार्गदर्शन सुलभ हो। किसानों को मुनाफे की सरकारी गारंटी,घटतौली पर पूर्णतःरोक लगें।
34 नई चीनी मिल चालू होने से लाखों लोगों को प्रत्यक्ष या परोक्ष रोजगार मिलेंगे,आसपास परिवहन मरम्मती,पैकेजिंग एवं सह उत्पाद आधारित तरह-तरह के उद्योग लगेंगे।जिससे सरकार को राजस्व बढेंगी।नई चीनी मिल को चलाने का सपना तभी साकार होगा,जब किसानों को सरकार पर भरोसा होगा और किसान गन्ने की खेती के लिए तैयार होंगे।सरकार को किसानों के बीच भरोसा,सुविधा और लाभ तीनों एक साथ सुनिश्चित करना होगा।महापंचायत में किसान नेता राम नरेश महतो,राम विनोद महतो,राम नरेश सिंह, अरविंद राय,रामचरित्र महतो,संजीव कुमार राय,संजय कुमार चौधरी,राज किशोर सिंह,विद्यानंद राय,राम विनोद राय,संतोष ईश्वर,श्याम नंदन चौधरीऔर तारा जी ने अपने विचार व्यक्त किये।आंदोलन को तेज करने हेतु संगठन का हसनपुर चीनी मिल इकाई का गठन हुआ। जिसमें 25 सदस्यों का संचालन समिति तथा चार संयोजक धर्मेंद्र प्रसाद सिंह,हिमांशु शेखर सिंह,संजीव कुमार राय एवं चंदन कुमार चुने गए।
डीएनबी भारत डेस्क
