नरक निवारण चतुर्दशी पर विशेष पूजा, अकाल मृत्यु के भय और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति के लिए उमड़ी भीड़
डीएनबी भारत डेस्क
समस्तीपुर शहर के प्रशिद्ध बाबा थानेश्वर स्थान मंदिर परिसर में नरक निवारण चतुर्दशी पूजा करने को लेकर हज़ारो की संख्या में श्रद्धालुओं पहुचे,वही इस पूजा का महत्व जीवन के पापों और नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति पाने, आत्म-शुद्धि करने और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने में है;

इस दिन व्रत और पूजा से मृत्यु के बाद नरक का भय दूर होता है और सुख-समृद्धि मिलती है, क्योंकि यह तिथि भगवान शिव को समर्पित है और इसे ‘अधनिवारक चतुर्दशी’ भी कहते हैं। यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है और हर साल माघ महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से जाने-अनजाने में हुए पाप धुल जाते हैं और नरक के कष्टों से मुक्ति मिलती है।
यह दिन आत्म-शुद्धि और मानसिक शांति के लिए विशेष माना जाता है, जिससे नकारात्मक सोच दूर होती है।महादेव इस दिन भक्तों की पुकार जल्दी सुनते हैं और उन्हें नरक यातनाओं से सुरक्षित रहने का वरदान देते हैं। यह जीवन से सभी बुरी और नकारात्मक ऊर्जाओं को दूर करने और एक नई शुरुआत करने का शुभ दिन है। जो भक्त व्रत रखते हैं, उन्हें मृत्यु के बाद यमराज के दंड का भय नहीं सताता।
इसे पापों का निवारण करने वाली तिथि के रूप में भी जाना जाता है। यह पूजा कैसे मनाते है ।इस दिन उपवास रखा जाता है और शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है।भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। कुछ क्षेत्रों में, विशेषकर दक्षिण भारत में, नरकासुर वध की कथा से जुड़ा उत्सव मनाया जाता है और तेल स्नान का विशेष महत्व है। चौमुखी दीपक जलाकर घर में सकारात्मकता लाई जाती है और अकाल मृत्यु से बचाव की प्रार्थना की जाती है।
समस्तीपुर संवाददाता अफरोज आलम की रिपोर्ट