डीएनबी भारत डेस्क
बेगूसराय के बछवाड़ा थाना क्षेत्र स्थित रानी तीन पंचायत में उस वक्त कोहराम मच गया, जब गंगा बाया नदी के गोलाघाट पर स्नान करने गया 11 वर्षीय मासूम गोविंद गहरे पानी की आगोश में समा गया। रानी तीन पंचायत के वार्ड संख्या 8 निवासी प्रभात कुमार चौधरी का यह नन्हा बेटा अपने पिता और छोटे भाई की उंगली थामे खुशी-खुशी नदी तट पर पहुंचा था, लेकिन किसी को क्या मालूम था कि यह सफर उसकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा।
नदी की कलकल बहती धारा में अचानक गोविंद का पैर फिसल गया और वह पलक झपकते ही अथाह गहरे पानी में समाने लगा। जब तक किनारे खड़े बेबस पिता और अन्य लोग अपने कलेजे के टुकड़े को बचाने के लिए हाथ-पैर मारते, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। देखते ही देखते वह मासूम सबकी आंखों के सामने नदी की गहराइयों में ओझल हो गया। चीख-पुकार सुनकर दौड़े ग्रामीणों ने पानी में गोता लगाकर भारी मशक्कत के बाद उसे बाहर तो निकाला, लेकिन अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों के एक शब्द ने पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी—गोविंद अब इस दुनिया में नहीं रहा।
घर के आंगन में अपने लाडले का बेजान जिस्म देख माता-पिता की चीत्कारों से पूरा इलाका दहल उठा। जिस बच्चे की किलकारियों से कल तक घर गूंजता था, वहां अब सिर्फ सिसकियां और करुण विलाप बाकी था। तक्षशिला इंटरनेशनल स्कूल के चौथी कक्षा के इस होनहार छात्र की मौत की खबर जैसे ही विद्यालय पहुंची, वहां सन्नाटा और गहरा मातम पसर गया। हमेशा अव्वल आने वाले अपने चहेते छात्र को याद कर शिक्षकों और सहपाठियों की आंखें छलक पड़ीं; दो मिनट का मौन रखकर प्रार्थना के साथ स्कूल को बंद कर दिया गया।
विद्यालय के निदेशक अमित विक्रम ने नम आंखों से कहा कि गोविंद बेहद होनहार था, उसकी असमय विदाई से जो खालीपन आया है, उसे कभी भरा नहीं जा सकेगा। मौके पर पहुंची पुलिस ने थानाध्यक्ष विकास कुमार राय के नेतृत्व में आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर शव को पोस्टमार्टम के लिए बेगूसराय सदर अस्पताल भेज दिया, लेकिन नदी किनारे छूटे उस मासूम के कदमों के निशान अब भी परिजनों को ताउम्र का ऐसा दर्द दे गए हैं, जो कभी नहीं भरेगा।
बेगूसराय बछवाड़ा संवाददाता मनोज कुमार राहुल की रिपोर्ट