भारत एक महान देश ही नहीं, अध्यात्म देश है, इसे ऋषि भूमि व महात्माओं का देश कहा जाता है- स्वामी चिदात्मन जी महाराज

DNB Bharat Desk

भाद्रपद मास शुक्ल पक्ष ऋषि पंचमी के पावन अवसर पर परम पूज्य गुरुदेव महर्षि चिदात्मन जी महाराज द्वारा सिद्धाश्रम सिमरिया धाम में पूजनोपरांत उन्होने कहा की भारत एक महान देश ही नहीं, अध्यात्म देश है। इसे ऋषि भूमि व महात्माओं का देश कहा जाता है। कारण श्रीस्टिकर्ता , पालनकर्ता और संहारकर्ता ब्रह्मा-ऋषि, विष्णु-ऋषि, शिव (रुद्र)-ऋषि—त्रिगुणशाली के तीनों ऋषियों के ये तीनों प्रतीक कहे गए हैं।

ये तीनों पवित्र ऋग्वेद, यजुर्वेद और सामवेद प्रमाणस्वरूप हैं, जो त्रिगुणशाली वर्ष के चारों नवरात्र के साथ-साथ ये चारों पदार्थ प्राप्ति कराने वाले हैं। इससे कायिक, वाचिक, मानसिक, सांसारिक व ज्ञात-अज्ञात दोष से मुक्ति एवं मनोनुकूल सफलता प्राप्त कराने वाले वर्ष के चारों नवरात्र ही नहीं बल्कि ऋषिपंचमी हैं। यह विभाजन वेद-व्यास जी के वेद-विभाजन के बाद ही निर्दिष्ट होता है। इसके पहले वेद एक था, जो ‘विद्’ धातु से बना है जिसका मतलब ‘जानना’ है। जिसमें 403 ऋषि आते हैं। इनमें 88 एकाकी शेष पारिवारिक हैं। इन ऋषियों के द्वारा शरीर-मंथन के द्वारा जो प्राप्त किया गया, वह विभाजन के पहले एक और विभाजनोपरांत चार रूप में हमारे सामने है।

भारत एक महान देश ही नहीं, अध्यात्म देश है, इसे ऋषि भूमि व महात्माओं का देश कहा जाता है- स्वामी चिदात्मन जी महाराज 2चातुर्मासांतर्गत जब ऋषिवृंद आदि कुंभ स्थली सिमरिया धाम में उपस्थित हुआ करते थे, तो जनहित, समाजहित, राष्ट्रहित, संस्कृतिहित और विश्व कल्याणार्थ जिनके द्वारा जो अन्वेषण होता था, वह एक प्रारूप ले लिया करता था। जो हमारे सामने वेद, वेदांग, इतिहास व पुराणों के रूप में वेदव्यास भगवान ने प्रस्तुत किया। इस चातुर्मासांतर्गत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी को अनादिकाल से (सतयुग) ही ऋषिपंचमी मनाया जाता रहा है। आज भी प्रतीक के रूप में सिद्धाश्रम माँ काली धाम में सप्तऋषि के साथ-साथ त्रि-ऋषि (ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र) की पूजा नित्य होती है और ऋषिपंचमी के समय विशेष रूप से किया जाता है।

भारत एक महान देश ही नहीं, अध्यात्म देश है, इसे ऋषि भूमि व महात्माओं का देश कहा जाता है- स्वामी चिदात्मन जी महाराज 3इसके साथ ही रुद्रपुर (रूदौली) में भी सप्तऋषि का पूजन होता है और अहियापुर में शांडिल्य ऋषि, दादपुर एवं मंगरोल में कश्यप ऋषि, पहसारा में वत्स ऋषि, भैरवार में भरद्वाज ऋषि तथा खम्हार में गौतम ऋषि का पूजन होता है। यथार्थतः बेगूसराय का वैदिक नाम— “वेद सृजन स्थली” सार्थक होता है।”

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