बेगूसराय में फॉर्मर रजिस्ट्री की समीक्षा: डीएम रिची पांडेय ने दिए तेजी लाने के निर्देश, अब तक 1.29 लाख किसानों का हुआ निबंधन

DNB Bharat Desk

जिला पदाधिकारी, बेगूसराय  रिची पांडेय द्वारा समाहरणालय स्थित कारगिल विजय सभा भवन में एग्री स्टैक योजना के अंतर्गत जिले में संचालित फॉर्मर रजिस्ट्री कार्य की विस्तृत समीक्षा की गई। समीक्षा बैठक में जिले में अब तक हुए फॉर्मर रजिस्ट्री, आवेदनों के सत्यापन एवं अंतिम स्वीकृति, पीएम-किसान योजना के लाभार्थियों के आच्छादन तथा अंचलों से प्राप्त जमाबंदियों के आधार पर पात्र किसानों के निबंधन की प्रगति की विस्तार से समीक्षा की गई।

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बैठक के दौरान जिला पदाधिकारी ने सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि फॉर्मर रजिस्ट्री कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अभियान में और तेजी लाई जाए। उन्होंने कहा कि एग्री स्टैक के अंतर्गत किसानों का डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है, इसलिए यह आवश्यक है कि जिले के सभी पात्र किसानों का समयबद्ध तरीके से फॉर्मर रजिस्ट्री निबंधन सुनिश्चित कराया जाए।

समीक्षा के क्रम में बताया गया कि जिले में अब तक कुल 1,29,164 किसानों का फॉर्मर रजिस्ट्री सफलतापूर्वक किया जा चुका है।

बेगूसराय में फॉर्मर रजिस्ट्री की समीक्षा: डीएम रिची पांडेय ने दिए तेजी लाने के निर्देश, अब तक 1.29 लाख किसानों का हुआ निबंधन 2पीएम-किसान योजना के सक्रिय लाभार्थियों के फॉर्मर रजिस्ट्री निबंधन की भी बैठक में समीक्षा की गई। जिले में कुल 1,07,062 सक्रिय पीएम-किसान लाभार्थियों में से अब तक 45,409 किसानों का फॉर्मर रजिस्ट्री निबंधन पूर्ण किया जा चुका है, जो लगभग 36.41 प्रतिशत है। इस दिशा में सभी प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को शेष लाभार्थियों को भी अभियान से जोड़ने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए गए।

पीएम-किसान लाभार्थियों के फॉर्मर रजिस्ट्री आच्छादन के मामले में डंडारी प्रखंड में 52.23 प्रतिशत, साहेबपुर कमाल में 50.93 प्रतिशत तथा गढ़पुरा में 50.62 प्रतिशत प्रगति दर्ज की गई है। जिला पदाधिकारी ने अन्य प्रखंडों को भी बेहतर प्रदर्शन करने वाले प्रखंडों से प्रेरणा लेते हुए अपने-अपने क्षेत्रों में अभियान को गति देने का निर्देश दिया।

बैठक में अंचल कार्यालयों से प्राप्त जमाबंदियों के आधार पर किसानों के फॉर्मर रजिस्ट्री निबंधन की स्थिति की भी समीक्षा की गई। वर्ष 2018 से 2026 के मध्य अंचल कार्यालयों से प्राप्त कुल 2,59,925 जमाबंदियों के आधार पर पात्र किसानों को चिन्हित कर उनका निबंधन कराया जा रहा है। इस क्रम में अब तक 76,322 किसानों का निबंधन पूर्ण किया जा चुका है। शेष 36,253 संपर्क योग्य किसानों को फॉर्मर रजिस्ट्री के दायरे में लाने के लिए विशेष अभियान संचालित करने का निर्देश दिया गया।

बेगूसराय में फॉर्मर रजिस्ट्री की समीक्षा: डीएम रिची पांडेय ने दिए तेजी लाने के निर्देश, अब तक 1.29 लाख किसानों का हुआ निबंधन 3जिला पदाधिकारी ने सभी प्रखंड कृषि पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने प्रखंडों में फॉर्मर रजिस्ट्री कार्य की नियमित समीक्षा करें तथा कृषि समन्वयकों एवं किसान सलाहकारों के माध्यम से अधिक से अधिक किसानों तक पहुंच सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि जिन किसानों का निबंधन अभी तक नहीं हो पाया है, उन्हें चिन्हित कर उनसे संपर्क स्थापित किया जाए तथा आवश्यक सहयोग प्रदान करते हुए उनका फॉर्मर रजिस्ट्री निबंधन कराया जाए।

जिला पदाधिकारी ने कहा कि फॉर्मर रजिस्ट्री किसानों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण डिजिटल व्यवस्था है। इसके माध्यम से किसानों का एकीकृत डिजिटल डेटाबेस तैयार किया जा रहा है, जिससे भविष्य में केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कृषि एवं किसान कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक अधिक सुगमता, पारदर्शिता एवं प्रभावी तरीके से पहुंचाने में सहायता मिलेगी।

बैठक में अपर समाहर्ता श्री बृज किशोर चौधरी, जिला कृषि पदाधिकारी, सभी प्रखंड कृषि पदाधिकारी एवं अन्य संबंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

इसी क्रम में आज आईआईटी रुड़की के डॉ विशेषज्ञों ने जिला पदाधिकारी से मुलाकात कर कार्बन क्रेडिट के विषय पर विस्तृत चर्चा की। चर्चा के दौरान आगामी वर्षों में इस संबंध में प्रभावी नीति तैयार करने पर विचार-विमर्श किया गया, ताकि किसानों को वृक्षारोपण एवं पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

प्रस्तावित नीति के माध्यम से किसानों को प्रति हेक्टेयर वृक्षारोपण क्षेत्र के आधार पर आर्थिक लाभ उपलब्ध कराने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। इसका उद्देश्य वृक्षारोपण के माध्यम से वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), मीथेन (CH₄) जैसी ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करना तथा कार्बन अवशोषण को बढ़ावा देना है।

इस पहल से एक ओर पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने में सहायता मिलेगी, वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए कार्बन क्रेडिट के माध्यम से अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित किया जा सकेगा।

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