डीएनबी भारत डेस्क
नालंदा जिले में मोहर्रम का पर्व शांतिपूर्ण और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। जिले के विभिन्न प्रखंडों में ताजिया और अखाड़ा जुलूस निकाले गए, लेकिन जिला मुख्यालय बिहारशरीफ में इस बार एक भी अखाड़ा जुलूस नहीं निकला। मुस्लिम समाज के लोगों का कहना है कि प्रशासन की सख्त शर्तों और पारंपरिक हथियारों के प्रदर्शन पर रोक के कारण उन्होंने लाइसेंस नहीं लिया और अखाड़ा जुलूस नहीं निकालने का फैसला किया।

वहीं, किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए शहर के सभी प्रमुख चौक-चौराहों पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी।मोहर्रम के अवसर पर बिहारशरीफ शहर में इस बार वर्षों पुरानी परंपरा टूटती नजर आई। जहां पहले शहर के विभिन्न इलाकों से अखाड़ा जुलूस निकलता था, वहीं इस बार पूरा शहर अखाड़ा जुलूस से खाली रहा। मुस्लिम समाज के लोगों का कहना है कि प्रशासन की ओर से जारी कड़े दिशा-निर्देशों के कारण उन्होंने अखाड़ा निकालने के लिए लाइसेंस नहीं लिया।
अंजुमन मुफिदुल इस्लाम, नालंदा के सचिव मोहम्मद अकबर आजाद ने कहा कि बिहारशरीफ में वर्षों से गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल पेश करते हुए मोहर्रम का अखाड़ा निकाला जाता रहा है, जिसमें हिंदू और मुस्लिम दोनों समुदाय के लोग बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे। लेकिन पिछले दो वर्षों से प्रशासन के सख्त नियमों और पारंपरिक लाठी-भाला जैसे करतबों पर प्रतिबंध के कारण अखाड़ा जुलूस लगभग बंद हो गया है।
उनका कहना है कि मोहर्रम के अखाड़े की पहचान ही पारंपरिक युद्धकला और फन के प्रदर्शन से होती है, लेकिन जब इसकी अनुमति नहीं मिल रही है तो अखाड़ा निकालने का औचित्य नहीं रह जाता।
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