थरथरी प्रखंड के अमेरा गांव में स्थित है स्कूल,लगभग 70 बच्चे का नामांकन, शिक्षक प्रतिनियुक्ति की है मांग।
डीएनबी भारत डेस्क

नालंदा जिले के थरथरी प्रखंड से शिक्षा व्यवस्था की बदहाली की एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। यहां एक शिक्षक के रिटायर होते ही पूरा विद्यालय ही “रिटायर” हो गया। सुनने में भले अजीब लगे, लेकिन यह हकीकत है।
थरथरी प्रखंड के अमेरा गांव स्थित डॉ. रामस्वरूप संस्कृत प्राथमिक सह मध्य विद्यालय पिछले पांच महीनों से पूरी तरह बंद पड़ा है। विद्यालय के एकमात्र शिक्षक उमाकांत पाण्डेय के 31 दिसंबर 2025 को सेवानिवृत्त होने के बाद से यहां पठन-पाठन पूरी तरह ठप हो गया है।
करीब 70 से 80 छात्र-छात्राओं वाले इस विद्यालय में अब बच्चों की किलकारियां नहीं, बल्कि सन्नाटा पसरा हुआ है। स्कूल के दो-तीन कमरों में कभी पढ़ाई की आवाज गूंजती थी, लेकिन आज वहां सिर्फ ताले और वीरानी नजर आती है। हालत यह है कि विद्यालय में रोज सिर्फ रसोइया पहुंचकर साफ-सफाई कर लौट जाती है, जबकि बच्चे शिक्षा के अधिकार से वंचित होकर इधर-उधर भटकने को मजबूर हैं।
विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष अमरजीत कुमार समेत ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार शिक्षा विभाग और अधिकारियों को इसकी जानकारी दी गई, लेकिन अब तक किसी शिक्षक की प्रतिनियुक्ति नहीं की गई। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासनिक उदासीनता के कारण वर्ष 1977 में स्थापित यह संस्कृत विद्यालय अपनी बदहाली पर आंसू बहाने को मजबूर है।
ग्रामीण ने सरकार एवं शिक्षा विभाग से अविलंब शिक्षकों की नियुक्ति करने की मांग की है, ताकि बच्चों का भविष्य अंधकारमय होने से बच सके। सवाल यह है कि जब शिक्षा को विकास की नींव माना जाता है, तब आखिर पांच महीने से बंद पड़े इस विद्यालय की सुध लेने वाला कौन है?
डीएनबी भारत डेस्क