डीएनबी भारत डेस्क
समस्तीपुर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के दादपुर में हुई सूरज कुमार हत्याकांड का पुलिस ने महज 24 घंटे के भीतर खुलासा कर दिया। जांच में जो सच सामने आया, वह सिर्फ एक हत्या की कहानी नहीं, बल्कि रिश्तों के टूटते भरोसे और जमीन के लिए बढ़ती संवेदनहीनता की दर्दनाक तस्वीर भी है।

पुलिस के अनुसार, जिस सूरज कुमार की गोली मारकर हत्या की गई, उसका हत्यारा कोई बाहरी अपराधी नहीं, बल्कि उसका अपना चचेरा भाई निकला। वर्षों से चल रहे जमीन विवाद ने आखिरकार एक परिवार को ऐसा जख्म दे दिया, जिसकी भरपाई शायद कभी नहीं हो सकेगी। एक मामूली कहासुनी ने इतनी भयावह शक्ल ले ली कि एक युवक की जान चली गई और कई परिवारों की खुशियां उजड़ गईं।
समस्तीपुर पुलिस की त्वरित कार्रवाई निश्चित रूप से सराहनीय है। 24 घंटे के भीतर आरोपी की गिरफ्तारी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर मामले का उद्भेदन यह दिखाता है कि यदि इच्छाशक्ति हो तो अपराधों का जल्द खुलासा संभव है। लेकिन इस घटना ने समाज के सामने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है— आखिर जमीन का एक टुकड़ा इंसानी रिश्तों और जीवन से इतना बड़ा कैसे हो गया?
एक पत्रकार के तौर पर वर्षों से अपराध की खबरें कवर करते हुए मैंने देखा है कि अधिकांश हत्याओं के पीछे या तो जमीन का विवाद होता है, या अहंकार और गुस्से का टकराव। दादपुर की यह घटना भी उसी कड़वी सच्चाई की एक और मिसाल है। दुख इस बात का है कि जिस भाई के साथ बचपन की यादें जुड़ी हों, जिसके साथ एक ही आंगन में खेलकर बड़े हुए हों, उसी के खिलाफ हथियार उठाने की नौबत आ जाए। यह सिर्फ कानून-व्यवस्था का विषय नहीं, बल्कि समाज और परिवारों में संवाद की कमी का भी संकेत है।
जमीन, पैसा और संपत्ति फिर से कमाई जा सकती है, लेकिन एक बार चली गई जिंदगी और टूट चुके रिश्ते कभी वापस नहीं आते। समाज को इस घटना से सीख लेने की जरूरत है कि विवाद चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, उसका समाधान कानून और बातचीत के जरिए होना चाहिए, हथियार के जरिए नहीं। दादपुर हत्याकांड का खुलासा भले हो गया हो, लेकिन यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि जब रिश्तों पर लालच हावी हो जाता है, तब सबसे बड़ी हार इंसानियत की होती है।
समस्तीपुर संवाददाता अफरोज आलम की रिपोर्ट