पोस्टर पिरामिड, मार्मिक स्लोगन और प्रेरक स्पीच के माध्यम से बच्चों ने दुनिया से कहा – “मिसाइलों की मार से नहीं बल्कि प्रभावी संवाद से समाधान”
डीएनबी भारत डेस्क
राजकीयकृत मध्य विद्यालय, बीहट में शनिवार को विद्यालय की बाल संसद, चारों हाउस लीडर्स, क्लास मॉनिटर्स, यूथ एंड इको क्लब तथा ग्रीन क्लब के प्रतिनिधि विद्यार्थियों द्वारा वैश्विक स्तर पर व्याप्त विनाशकारी युद्धों के विरुद्ध शांति, प्रेम, सौहार्द, आपसी मिल्लत, सहयोग और भाईचारा के पक्ष में अत्यंत भावपूर्ण तरीके से अपनी आवाज बुलंद की ।

वहीं कार्यक्रम के दौरान बच्चों ने एक अनूठे “पोस्टर पिरामिड” का निर्माण कर विश्व शांति का संदेश दिया, जो आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा।बच्चों द्वारा प्रदर्शित पोस्टरों और नारों में “जहाँ मिसाइल गिरते हैं, वहाँ बचपन के सपने मरते हैं”,“हमें किताबें दो, बंदूकें नहीं”,“युद्ध पर खर्च, विकास पर कर्ज”,“शांति ही सच्ची जीत है” तथा“एक मिसाइल लाखों पेड़ों के वर्षों के प्रयासों को मिटा देती है”जैसे संदेशों ने सभी को गहराई से प्रभावित किया। वहीं विद्यार्थियों ने अपने वक्तव्यों में कहा कि दुनिया में शांति का प्रसार होना चाहिए तथा हर प्रकार के युद्ध पर वैश्विक स्तर पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए। बच्चों ने यह भी रेखांकित किया कि युद्ध केवल जान-माल और वित्तीय संसाधनों की ही क्षति नहीं करता, बल्कि पर्यावरण को भी गहरा नुकसान पहुँचाता है।
एक मिसाइल, बम या युद्धक विस्फोट से निकलने वाली विषाक्त गैसें और उसके विनाशकारी प्रभाव, लाखों वृक्षारोपण अभियानों के वर्षों के प्रयासों को कुछ ही क्षणों में निरर्थक बना देते हैं। इस अवसर पर जाने-माने शिक्षाविद्, आरटीई फोरम बिहार के राज्य संयोजक एवं पीयूसीएल बिहार के राज्य सचिव मंडल सदस्य अनिल कुमार राय ने बच्चों की वैचारिक परिपक्वता और मानवीय संवेदनशीलता की सराहना करते हुए कहा कि “जब बच्चे युद्ध के विरुद्ध और मानवता के पक्ष में अपनी आवाज बुलंद करने लगते हैं, तब यह विद्यालयी गतिविधि से अधिक पूरी दुनिया के लिए नैतिक संदेश का प्रतीक बन जाती है। आज विश्व समुदाय को यह समझना होगा कि हथियारों पर खर्च की जाने वाली संपदा यदि शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण संरक्षण पर खर्च होती, तो दुनिया कहीं अधिक सुरक्षित, संवेदनशील और खुशहाल होती। आने वाली पीढ़ियों को भय और खंडहर नहीं, बल्कि संवाद, सह-अस्तित्व और शांति की विरासत मिलनी चाहिए।
”वहीं विद्यालय के प्रधानाध्यापक रंजन कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि “शिक्षा के सबसे महत्वपूर्ण उद्देश्यों की पूर्ति तभी हो सकेगी जब हम उन्हें संवेदनशील और विवेकशील वैश्विक नागरिक बना सकेंगे। यदि विद्यालयों के बच्चे आज युद्ध, पर्यावरण विनाश और मानवता के संकट पर गंभीर प्रश्न उठा रहे हैं, तो यह शिक्षा की वास्तविक सफलता है। दुनिया के शक्तिशाली देशों को यह समझना होगा कि युद्ध किसी भी सभ्यता की उपलब्धि नहीं, बल्कि उसकी विफलता का प्रतीक है। जिस धन से पुस्तकालय, विद्यालय, अस्पताल और हरित संसार बनाए जा सकते हैं, उसी धन से विनाश के हथियार तैयार किए जा रहे हैं। बच्चों की यह शांति अपील मानवता के पक्ष में एक अत्यंत महत्वपूर्ण नैतिक हस्तक्षेप है।
” कार्यक्रम के दौरान बाल संसद के प्रतिनिधियों ने संयुक्त राष्ट्र संघ से समुचित हस्तक्षेप की माँग करते हुए भारत सरकार एवं राष्ट्रपति के नाम अपील पत्र भेजने के लिए अनिल कुमार राय से अनुरोध किया। बच्चों ने संयुक्त राष्ट्र संघ को भेजे जाने हेतु अपनी पेंटिंग्स और स्लोगन पोस्टर भी उन्हें सौंपे।
कार्यक्रम संचालन में वरिष्ठ शिक्षक अनुपमा सिंह, प्रीति कुमारी, स्वयंसेवी शिक्षक अभिनव कुणाल और राजन कुमार सहित श्याम स्कूल ऑफ एजुकेशन के प्रशिक्षुओं ने उल्लेखनीय योगदान दिया। कार्यक्रम में सुहानी, दिव्या, मीठी, सृष्टि, स्वीकृति, माही, दीपू, कल्याणी, पायल, शबनम, सौम्या शर्मा सहित दर्जनों बच्चों की शानदार भागीदारी ने उपस्थित अतिथि एवं शिक्षकों को अत्यंत प्रभावित किया। कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों ने सामूहिक रूप से शांति शपथ लेते हुए मानवता, सह-अस्तित्व, भाईचारे और पर्यावरण संरक्षण के मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
बेगूसराय बीहट संवाददाता धरमवीर कुमार की रिपोर्ट