डीएनबी भारत डेस्क
तेघड़ा (बेगूसराय) – अनुमंडल पदाधिकारी श्री राकेश कुमार की अध्यक्षता में भरण-पोषण से संबंधित एक महत्वपूर्ण मामले की सुनवाई अनुमंडल कार्यालय कक्ष में संपन्न हुई। यह मामला सुनेना देवी (पति–स्व. दिनेश सिंह) बनाम श्री सुजीत कुमार (पुत्र–स्व. दिनेश सिंह) के बीच लंबित था।

सुनवाई के दौरान जब सुनेना देवी ने अपनी व्यथा व्यक्त की, तो उनकी आंखों से आंसू छलक पड़े। इस भावुक क्षण ने पूरे माहौल को गंभीर बना दिया। अनुमंडल पदाधिकारी श्री राकेश कुमार ने मानवीय संवेदनशीलता का परिचय देते हुए श्री सुजीत कुमार को समझाया कि माता-पिता की सेवा और उनका सम्मान करना प्रत्येक संतान का प्रथम कर्तव्य है।
उन्होंने कहा कि “एक मां का आंसू किसी भी बेटे के लिए सबसे बड़ी चेतावनी है। जिस मां ने जन्म दिया, उसकी उपेक्षा समाज के लिए भी चिंताजनक है।”
एसडीएम के समझाने और सकारात्मक पहल का प्रभाव पड़ा, जिसके बाद श्री सुजीत कुमार अपनी मां सुनेना देवी के भरण-पोषण के लिए सहमत हो गए। तत्पश्चात भरण-पोषण हेतु एक निर्धारित राशि तय की गई, जिससे दोनों पक्षों में संतोष देखा गया।
एसडीएम की आमजनों से अपील:
अनुमंडल पदाधिकारी श्री राकेश कुमार ने इस अवसर पर अत्यंत भावुक शब्दों में आम जनता से अपील करते हुए कहा –
माता-पिता केवल हमारे जन्मदाता ही नहीं, बल्कि हमारे जीवन के पहले शिक्षक, मार्गदर्शक और सबसे बड़े संरक्षक होते हैं। उन्होंने अपने सुख, अपनी इच्छाओं और अपने जीवन के अनगिनत वर्षों का त्याग कर हमें इस योग्य बनाया कि हम समाज में सम्मानपूर्वक खड़े हो सकें। जब वही माता-पिता अपने जीवन के अंतिम पड़ाव में उपेक्षित हो जाते हैं, तो यह न केवल एक परिवार की विफलता होती है, बल्कि पूरे समाज के लिए चिंता का विषय बन जाता है।
मैं सभी नागरिकों से आग्रह करता हूं कि अपने माता-पिता को कभी अकेला न छोड़ें। उनका आशीर्वाद ही हमारे जीवन की सबसे बड़ी पूंजी है। आइए, हम सभी मिलकर एक ऐसे समाज का निर्माण करें, जहां बुजुर्गों को सम्मान, सुरक्षा और स्नेह मिले, और किसी मां की आंखों में बेबसी के आंसू न आएं।”
इस पहल से न केवल एक परिवार में सुलह हुई, बल्कि समाज में मानवीय मूल्यों और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर एक सकारात्मक संदेश भी प्रसारित हुआ है।
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