1971 के विस्थापित किसानों की उपेक्षा पर आक्रोश: 400 एकड़ फसल जलमग्न होने पर भी राहत से वंचित, दी आंदोलन की चेतावनी

DNB Bharat Desk

बछवाड़ा  प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत रानी-1 पंचायत के झमटिया गांव में सोमवार को किसान राम सुरेश कुंवर के आवास पर दियारा क्षेत्र के विस्थापित किसानों की एक अहम बैठक हुई। बैठक में किसानों ने दशकों पुरानी अनसुनी समस्याओं को लेकर प्रशासन के रवैये पर गहरा आक्रोश जताया।

किसानों ने बताया कि वर्ष 1971 से पूर्व वे झमटिया, चगाजी और मोहम्मदपुर फत्ता राजस्व गांवों में बसते थे। 1971 में गंगा के भीषण कटाव व प्रलयंकारी बाढ़ में उनका आशियाना नदी में समा गया। बाद में प्रशासन ने उन्हें नारेपुर (थाना सं. 43) अंतर्गत बेगमसराय कोठी की जमीन पर मात्र तीन-तीन डिसमिल जमीन देकर पुनर्वासित किया। घर का पता भले बदला, लेकिन आजीविका का जरिया आज भी दियारा ही है। वर्तमान में विशनपुर पंचायत अंतर्गत उक्त मौजों में इन किसानों की लगभग 400 एकड़ उपजाऊ भूमि है, जिस पर वे मेहनत से खेती करते हैं।

1971 के विस्थापित किसानों की उपेक्षा पर आक्रोश: 400 एकड़ फसल जलमग्न होने पर भी राहत से वंचित, दी आंदोलन की चेतावनी 2किसानों का गंभीर आरोप है कि प्रशासनिक नियमों के तहत बाढ़ राहत और फसल क्षतिपूर्ति केवल उन्हीं को दी जाती है, जो वर्तमान में दियारे में रह रहे हैं। पुनर्वास स्थल पर रहने के कारण 400 एकड़ की तैयार फसल जलमग्न होने के बावजूद उन्हें हर साल मुआवजे से बेदखल कर दिया जाता है। परिवार का भरण-पोषण, बच्चों की शिक्षा और दवा-इलाज सब इसी खेती पर निर्भर है, ऐसे में यह उपेक्षा उनके साथ खुला अन्याय है।

बैठक में चंद्रमणी कुंवर, उमेश कुंवर कवि, सरोज राय, सुनील कुंवर, बबलू कुंवर, पंकज झा, राम विनय कुंवर और छोटू कुंवर समेत कई किसान मौजूद रहे। किसानों ने जिलाधिकारी, मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री से मांग की है कि 400 एकड़ भूमि की स्थलीय जांच कराकर तुरंत फसल क्षतिपूर्ति दी जाए और नियमों में ढील देकर उन्हें स्थायी रूप से आपदा राहत से जोड़ा जाए। किसानों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ, तो वे सड़क पर उतरकर चरणबद्ध आंदोलन करेंगे।

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