डिजिटल युग में भगवानपुर की स्वास्थ्य सेवा: ‘साक्षी’ पोर्टल से अब हर सुविधा पर होगी पैनी नजर

DNB Bharat Desk

बेगूसराय-ग्रामीण भारत की स्वास्थ्य सेवाओं को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में बेगूसराय का भगवानपुर प्रखंड एक नई मिसाल बनने की ओर अग्रसर है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (पी.एच.सी.) में हाल ही में आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला ने स्वास्थ्य व्यवस्था में ‘डिजिटल क्रांति’ की नींव रखी है। अब स्वास्थ्य सेवाओं के मूल्यांकन के लिए ‘साक्षी’ पोर्टल का उपयोग किया जाएगा, जो न केवल पारदर्शिता बढ़ाएगा, बल्कि मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं में भी क्रांतिकारी बदलाव लाएगा।

- Sponsored Ads-

इस कार्यशाला में पिरामल फाउंडेशन के दीपक मिश्रा ने स्वास्थ्य कर्मियों को तकनीकी बारीकियों से रूबरू कराया। अब ‘साक्षी’ पोर्टल के माध्यम से स्वास्थ्य केंद्रों की कार्यप्रणाली का स्व-मूल्यांकन होगा। प्रखंड स्वास्थ्य प्रबंधक आशुतोष गांधी के अनुसार, दवाओं का स्टॉक, कर्मियों की उपस्थिति और उपचार की गुणवत्ता की मॉनिटरिंग अब ‘रियल टाइम’ में संभव होगी। प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दिलीप कुमार ने स्पष्ट किया कि इस पोर्टल का लक्ष्य केवल डेटा एंट्री नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं में मरीजों का खोया हुआ विश्वास वापस पाना है।

कार्यशाला में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं (एच.आर.पी.) की सहायता के लिए अब एक समर्पित हेल्प डेस्क नंबर 8544421213 संचालित किया जा रहा है। अब इन महिलाओं को अपनी जांच की तारीख या स्वास्थ्य संबंधी परामर्श के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा—उन्हें सीधे फोन के माध्यम से मार्गदर्शन मिलेगा।

एन.क्यू.ए.एस. (नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस स्टैंडर्ड्स) भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा संचालित एक अत्यंत प्रतिष्ठित मानक है। इसका उद्देश्य सरकारी अस्पतालों को एक ‘क्वालिटी सर्टिफाइड’ संस्थान बनाना है।

 1.स्व-मूल्यांकन (सेल्फ-असेसमेंट):स्वास्थ्य केंद्र सबसे पहले स्वयं को एन.क्यू.ए.एस. के निर्धारित मानकों (जो दवाओं, स्वच्छता, प्रसव और आपातकालीन सेवाओं पर आधारित होते हैं) पर आंकते हैं। ‘साक्षी’ पोर्टल इसी प्रक्रिया का हिस्सा है।

 2.राज्य स्तरीय मूल्यांकन: स्व-मूल्यांकन के बाद राज्य स्तर की एक टीम अस्पताल का दौरा करती है और सुविधाओं का निरीक्षण करती है।

 3. राष्ट्रीय स्तरीय मूल्यांकन: जब अस्पताल राज्य स्तर के मानकों पर खरा उतरता है, तो राष्ट्रीय स्तर की टीम द्वारा अंतिम निरीक्षण किया जाता है।

 4.प्रमाणन:सभी मानकों (अस्सी प्रतिशत से अधिक अंक) पर सफल होने के बाद स्वास्थ्य केंद्र को ‘एन.क्यू.ए.एस. सर्टिफाइड’ घोषित किया जाता है।

बेहतर संसाधन: प्रमाणित अस्पतालों को सरकार से अतिरिक्त वित्तीय प्रोत्साहन (इंसेंटिव्स) मिलता है, जिससे अस्पताल की कायाकल्प करने में मदद मिलती है।

मानक सेवाएं: मरीजों को यह आश्वासन मिलता है कि उन्हें मिलने वाला इलाज, दवाएं और परामर्श राष्ट्रीय स्तर के मानकों के अनुसार है।

जवाबदेही:यह प्रमाणन स्वास्थ्य कर्मियों को अधिक अनुशासित बनाता है, जिससे कार्यस्थल पर साफ-सफाई और मरीजों के साथ व्यवहार में सुधार आता है।भरोसा:एक एन.क्यू.ए.एस. प्रमाणित केंद्र सरकारी योजनाओं के प्रति जनता का विश्वास अटूट बनाता है, जिससे टीकाकरण और प्रसव जैसी सेवाओं के लिए लोग अधिक संख्या में अस्पताल आते हैं।

आज के बैठक में अनिल कुमार , sts , राजू कुमार सहित अन्य चिकित्सा कर्मी मौजूद थे

Share This Article