डीएनबी भारत डेस्क
नालंदा जिले के राजगीर में आयोजित विश्व प्रसिद्ध मलमास मेले के दौरान रविवार को दूसरे शाही स्नान का भव्य आयोजन किया गया। पूर्णिमा के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। आधी रात से ही श्रद्धालु पवित्र कुंडों में स्नान के लिए कतारबद्ध होने लगे थे। सुबह 6 बजे विधिवत शाही स्नान की शुरुआत हुई, जिसमें सबसे पहले उदासीन अखाड़े के साधु-संतों ने आस्था की डुबकी लगाई।

इसके बाद विभिन्न अखाड़ों के साधु-संतों का जत्था गाजे-बाजे और रथों के साथ कुंडों की ओर बढ़ता रहा। शाही स्नान में खाक चौक, बड़ी संगत, कैलाश आश्रम, कबीर पंथी, फलाहारी बाबा सहित डेढ़ दर्जन से अधिक अखाड़ों के साधु-संत शामिल हुए। जय श्रीराम और हर-हर महादेव के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा। दूर-दराज से पहुंचे श्रद्धालुओं ने भी पवित्र कुंडों में स्नान कर पुण्य लाभ अर्जित किया। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट रहा। प्रत्येक अखाड़े के साथ दंडाधिकारी और पुलिस बल की विशेष तैनाती की गई थी।
श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से कतारबद्ध कर कुंडों तक पहुंचाया गया। राजगीर तपोवन तीर्थ रक्षार्थ पंडा समिति के सचिव विकास उपाध्याय ने बताया कि अब तक दो लाख से अधिक श्रद्धालु स्नान कर चुके थे और शाम तक यह संख्या लाखों तक पहुंच सकता है।शाही स्नान के दौरान साधु-संतों ने विश्व शांति की भी कामना की। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में दुनिया युद्ध और तनाव के दौर से गुजर रही है।
ऐसे में भगवान से प्रार्थना है कि युद्ध विराम हो और पूरी दुनिया में शांति एवं भाईचारे का वातावरण कायम हो।गौरतलब है कि राजगीर का मलमास मेला तीन वर्षों में एक बार आयोजित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राजगीर के पवित्र कुंड 33 कोटि देवी-देवताओं से जुड़े हुए हैं और मलमास के दौरान यहां स्नान का विशेष महत्व माना जाता है। श्रद्धालुओं का मानना है कि इस अवसर पर स्नान और पूजा-अर्चना से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
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