मलमास मेले में आस्था का अनूठा दृश्य, गाय की पूंछ पकड़ श्रद्धालुओं ने मांगा मोक्ष।
डीएनबी भारत डेस्क

भीषण गर्मी के बाबजूद ऐतिहासिक और पौराणिक नगरी राजगीर में आयोजित विश्व प्रसिद्ध मलमास मेले में आस्था का एक अनूठा नजारा देखने को मिला।जहां लगभग 44 डिग्री सेल्सियस तापमान के बीच पुरुषोत्तम मास के इस पावन अवसर पर देश-विदेश से आए हजारों श्रद्धालुओं के जनसैलाब से पूरी धर्मनगरी धर्ममय हो उठी।
सुबह से ही पवित्र कुंडों और नदियों में स्नान करने के लिए श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी रहती है। चारों तरफ भक्ति का माहौल बना रहता है। इस दौरान सबसे अद्भुत और आकर्षक दृश्य पवित्र वैतरणी नदी के तट पर देखने को मिला, जहां सदियों पुरानी सनातन परंपरा को जीवंत करते हुए हजारों श्रद्धालुओं ने गाय की पूंछ पकड़कर नदी पार की और अपने जीवन के लिए मोक्ष की कामना की।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सनातन धर्म में वैतरणी नदी को पौराणिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है। ऐसी मान्यता है कि मृत्यु के पश्चात आत्मा को परलोक जाते समय वैतरणी नदी पार करनी पड़ती है। गाय को इस भवसागर से पार लगाने वाली मोक्षदायिनी माना गया है। इसी अटूट विश्वास के साथ सुबह से लेकर देर शाम तक वैतरणी तट पर महिलाओं, बुजुर्गों और युवाओं की लंबी कतारें लगी रहती है।
महिलाओं में इस अनुष्ठान को लेकर विशेष उत्साह देखा गया, जिनका मानना है कि इस विधि-विधान से परिवार में सुख-समृद्धि आती है और जाने-अनजाने में हुए पापों से मुक्ति मिलती है। पुरोहितों के अनुसार पुरुषोत्तम मास में किया गया कोई भी जप, तप, दान और स्नान सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फलदायी होता है, जिससे इस परंपरा का महत्व और भी बढ़ जाता है।इतनी भारी भीड़ के बावजूद इस बार मेला क्षेत्र में प्रशासन की सक्रियता और मुस्तैदी साफ तौर पर देखने को मिल रही है।
भीड़ नियंत्रण, सुरक्षा, साफ-सफाई से लेकर पेयजल और स्वास्थ्य सेवाओं के लिए प्रशासनिक स्तर पर पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर दंडाधिकारियों और पुलिस बल की तैनाती के साथ ही सीसीटीवी कैमरों से पूरी गतिविधि पर पैनी नजर रखी जा रही है।
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