डीएनबी भारत डेस्क
पटना: विशिष्ट विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 के विरोध में बिहार के विभिन्न पारंपरिक विश्वविद्यालयों के शिक्षक और कर्मचारी पटना के जेडी विमेंस कॉलेज में एकत्रित हुए। वे अपनी मांगों को लेकर राज्यपाल से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपना चाहते थे। इस कार्यक्रम की सूचना स्थानीय पुलिस प्रशासन और एसडीओ को पहले ही दे दी गई थी।
इस विरोध कार्यक्रम में बेगूसराय जिले के बरौनी स्थित एपीएसएम कॉलेज की ओर से डॉ सुशील कुमार, डॉ. लव कुमार सिंह, डॉ. नंद किशोर पंडित, डॉ अब्दुल रहीम ,डॉ. श्रवण कुमार, ध्रुव देव कुमार, मनोज कुमार, शिव प्रकाश झा सहित अन्य शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने प्रतिनिधित्व किया।
शिक्षकों और कर्मचारियों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन ने उनका सहयोग करने के बजाय जेडी विमेंस कॉलेज के गेट को बंद कर दिया। शिक्षकों द्वारा गेट खोलने का आग्रह किए जाने के बाद गेट खोला गया। इसके बाद पुलिस ने प्रदर्शन में शामिल शिक्षकों और कर्मचारियों को बसों में बैठाकर अलग-अलग दूरस्थ स्थानों पर ले जाकर थानों में रखा।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उनकी बात नहीं सुनी और उनके साथ कठोर व्यवहार किया। महिला शिक्षिकाओं के साथ भी अभद्रता करने और उन्हें जबरन बस में बैठाने का आरोप लगाया गया है। शिक्षकों एवं कर्मचारियों का कहना है कि वे अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से राज्यपाल तक पहुंचाना चाहते थे, लेकिन उन्हें ज्ञापन सौंपने का अवसर नहीं दिया गया।
शिक्षक एवं कर्मचारी विशिष्ट विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 को वापस लेने और बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 के प्रावधानों के तहत विश्वविद्यालयों की स्थापना करने की मांग कर रहे हैं। इस अधिनियम के तहत राज्य सरकार ने माता सीता विश्वविद्यालय और दिनकर विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में कदम उठाने की मंशा जताई है। हालांकि, प्रदर्शनकारी इस उद्देश्य के विरोध में नहीं, बल्कि विश्वविद्यालयों की स्थापना के लिए अपनाए गए अधिनियम के प्रावधानों और मौजूदा बिहार विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 से अलग व्यवस्था को लेकर अपनी आपत्ति जता रहे हैं।
शिक्षकों एवं कर्मचारियों का कहना है कि विश्वविद्यालयों की स्थापना और संचालन से जुड़े फैसले लेते समय शिक्षकों, कर्मचारियों तथा मौजूदा शैक्षणिक संस्थानों के हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए। उनका मानना है कि उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण निर्णयों में संबंधित पक्षों से विचार-विमर्श किया जाना आवश्यक है।
शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से रखना उनका अधिकार है। शिक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान बातचीत और विचार-विमर्श के माध्यम से किया जाना चाहिए। उन्होंने मांग की कि उनकी बात सुनी जाए, विशिष्ट विश्वविद्यालय अधिनियम, 2026 पर पुनर्विचार किया जाए और बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर उचित निर्णय लिया जाए।
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