सिमरिया में 118वीं दिनकर जयंती: ‘जिस गाँव की हर दीवार पर कविता दिखे, वह दिनकर का गाँव है’- प्रदीप बिहारी

DNB Bharat Desk

रामकृष्ण इंग्लिश स्कूल, सिमरिया में गुरुवार को दिनकर स्मृति विकास समिति द्वारा आयोजित राष्ट्रकवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के 118वें जयंती समारोह के पांचवें दिन एक विचार गोष्ठी व सांस्कृतिक कार्यक्रम का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित प्रख्यात साहित्यकार प्रदीप बिहारी ने कहा कि जिस प्रकार मिथिला में प्रसिद्ध था कि जिस गाँव का सुग्गा भी वेदमंत्र का पाठ करे, वह मंडन मिश्र का गाँव है; ठीक वैसे ही जिस गाँव की हर दीवार पर कविता लिखी हुई मिले, समझो वह दिनकर का गाँव है।

वहीं, गोष्ठी में बच्चों को संबोधित करते हुए बेगूसराय नगर निगम की वार्ड पार्षद सह कवयित्री शगुफ्ता ताजवर ने कहा कि दिनकर की रचनाओं में संपूर्ण जीवन का सार समाहित है। उनकी रचनाएं हमें यह प्रेरणा देती हैं कि जो व्यक्ति सदैव न्याय के पक्ष में खड़ा रहे और आत्मसम्मान के लिए संघर्ष करे, वही वास्तव में वीर कहलाने योग्य है।

सिमरिया में 118वीं दिनकर जयंती: 'जिस गाँव की हर दीवार पर कविता दिखे, वह दिनकर का गाँव है'- प्रदीप बिहारी 2इस अवसर पर सभा को दिनकर पुस्तकालय के अध्यक्ष विशंभर सिंह, युवा कवि ए. के. मनीष, रामनाथ सिंह, साहित्यकार श्यामनंदन निशाकर, विद्यालय प्रधान घनश्याम झा, शिक्षिका शानू प्रिया, पिंकी कुमारी एवं प्रियंका कुमारी आदि ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम के दूसरे सत्र में छात्र-छात्राओं द्वारा दिनकर जी के व्यक्तित्व पर प्रेरक भाषण, कविताओं का भावपूर्ण पाठ और उनकी लोकप्रिय रचनाओं ‘मिर्च का मज़ा’ व ‘चाँद का कुर्ता’ का शानदार नाट्य मंचन किया गया, जिसमें अनुराग, रिचा, दिव्या, निशांत, माधव, नयन, नव्या श्री, सृष्टि, आरव और आर्यन आदि बच्चों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया।

सिमरिया में 118वीं दिनकर जयंती: 'जिस गाँव की हर दीवार पर कविता दिखे, वह दिनकर का गाँव है'- प्रदीप बिहारी 3समारोह की अध्यक्षता समिति के अध्यक्ष कृष्ण कुमार शर्मा ने की, जबकि अतिथियों का स्वागत शिक्षिका आंचल कुमारी ने किया। मंच का सफल संचालन शिक्षक जितेंद्र झा ने किया और अंत में विद्यालय के निदेशक दीनबंधु कुमार द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। इस मौके पर विद्यालय के सभी शिक्षक, शिक्षिकाएं और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।

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