डीएनबी भारत डेस्क
अंतरराष्ट्रीय पर्यटक स्थल राजगीर में लगने वाले ऐतिहासिक और आस्था के महापर्व मलमास मेले की तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। हर तीन साल पर आयोजित होने वाला यह प्राचीन मेला 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक चलेगा। मेले को लेकर प्रशासनिक तैयारियां युद्धस्तर पर जारी हैं। कुंडों और पवित्र नदियों की लगातार साफ-सफाई कराई जा रही है ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को शाही स्नान में किसी तरह की परेशानी न हो।

इस बार मलमास मेले का उद्घाटन बिहार सरकार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी करेंगे। उद्घाटन समारोह में मंत्री श्रवण कुमार, सांसद कौशलेंद्र कुमार समेत कई जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।मलमास मेले में इस बार श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए खास आकर्षण का केंद्र भव्य राम मंदिर रहेगा। वहीं मेले में मनोरंजन के लिए बड़े-बड़े झूले, जादूगर शो, सर्कस जलपरी और थियेटर की भी व्यवस्था की गई है।श्रद्धालुओं के लिए विश्रामगृह भी बनाया गया।गाड़ियों के परिचालन को भी डायवर्ट किया गया है।
राजगीर पूरी तरह भक्तिमय माहौल में ढल चुका है स्थानीय पुजारियों के अनुसार, प्रयागराज की तर्ज पर आयोजित होने वाले इस मेले में श्रद्धालु राजगीर के 22 कुंडों और 52 धाराओं में स्नान कर अपनी मनोकामनाएं पूर्ण होने की कामना करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि मलमास के दौरान 33 करोड़ देवी-देवता राजगीर में प्रवास करते हैं, इसलिए यहां शाही स्नान का विशेष महत्व माना जाता है।मलमास मेले की शुरुआत पारंपरिक झंडोत्तोलन के साथ होती है। झंडोत्तोलन के बाद आसपास के क्षेत्रों में कोई भी शुभ कार्य नहीं किया जाता, जबकि राजगीर में मांगलिक कार्य जारी रहते हैं।
मान्यता है कि इस पवित्र माह में राजगीर के गर्म जलकुंडों में स्नान करने से पापों से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति होती है।वायु पुराण के अनुसार, मलमास में राजगीर के पवित्र कुंडों में एक दिन स्नान करने का पुण्य गंगा में पूरे वर्ष स्नान करने के बराबर माना गया है। धार्मिक कथाओं के मुताबिक यही वह पवित्र भूमि है जहां सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी ने यज्ञ किया था और बैतरणी नदी समेत कई धार्मिक स्थलों की स्थापना की थी। यही वजह है कि मलमास मेला आस्था, अध्यात्म और सनातन परंपरा का अद्भुत संगम माना जाता है।
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