नीतीश के गृहक्षेत्र नालंदा में कर्पूरी जयंती फीकी, 225 कुर्सियां, मौजूद रहे सिर्फ 36 कार्यकर्ता

DNB Bharat Desk

बिहार शरीफ के आईएमए हॉल में आज एक अजीब नज़ारा देखने को मिला, जहाँ जननायक कर्पूरी ठाकुर की 102 वीं जयंती तो मनाई गई, लेकिन बिना जोश, बिना भीड़ और लगभग बिना कार्यकर्ताओं के। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार कर्पूरी ठाकुर को अपना आदर्श मानते हैं। उनकी जयंती पर हर साल समाजवादी मूल्यों और आदर्शों पर चलने की शपथ ली जाती है।

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नीतीश के गृहक्षेत्र नालंदा में कर्पूरी जयंती फीकी, 225 कुर्सियां, मौजूद रहे सिर्फ 36 कार्यकर्ता 2लेकिन हैरानी की बात ये रही कि मुख्यमंत्री के गृह क्षेत्र नालंदा में ही जदयू कार्यकर्ताओं ने इस आयोजन से दूरी बना ली। सभागार के अंदर कुर्सियाँ लगी थीं पूरे 225, लेकिन मौजूद थे सिर्फ 36 कार्यकर्ता। बाक़ी कुर्सियाँ खाली रह गयी और कई जदयू कार्यकर्ता कार्यक्रम के अंदर जाने के बजाय बाहर धूप का आनंद लेते नज़र आए।सत्ता पक्ष के विधायक हों या नगर अध्यक्ष कोई भी एक सभागार तक नहीं भर सका।ऐसा लगा मानो कर्पूरी ठाकुर के आदर्शों से जदयू कार्यकर्ता ही भागते नज़र आ रहे हों।जहाँ श्रद्धांजलि होनी चाहिए थी, वहाँ अनुपस्थिति ने दर्द दे दिया।

नीतीश के गृहक्षेत्र नालंदा में कर्पूरी जयंती फीकी, 225 कुर्सियां, मौजूद रहे सिर्फ 36 कार्यकर्ता 3हालाँकि पार्टी अध्यक्ष मोहम्मद अरशद ने खाली कुर्सियों पर सफ़ाई दी। उनका कहना है कि पूरे प्रखंड में अलग-अलग जगहों पर कर्पूरी ठाकुर की जयंती मनाई जा रही थी, इसी वजह से हॉल खाली रहा। लेकिन इस पूरे मामले की ज़िम्मेदारी उन्होंने नगर अध्यक्ष मोहम्मद गुलरेज अंसारी पर डाल दी।सवाल यह उठता है की  क्या कर्पूरी ठाकुर सिर्फ भाषणों तक सीमित रह गए हैं?और क्या जदयू कार्यकर्ताओं में अब उनके आदर्शों के लिए वो सम्मान नहीं बचा? नालंदा से सवाल उठता है और जवाब अभी बाकी है।

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