डीएनबी भारत डेस्क
आगामी 6 जून को अस्थावां में आयोजित होने वाले समाजसेवी स्वर्गीय त्रिपुरारी सिंह उर्फ टीपी सिंह के शहादत दिवस कार्यक्रम को लेकर नालंदा की राजनीति गरमा गई है। कार्यक्रम से पहले ही टीपी सिंह के कई पुराने और करीबी समर्थकों ने इससे दूरी बनाने का ऐलान कर दिया है।

गुरुवार को बैठक में समर्थकों ने आरोप लगाया कि कुछ लोग टीपी सिंह के नाम पर राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश कर रहे हैं। टीपी सिंह के कट्टर समर्थक रहे बिपिन चौधरी, उमेश महतो, प्रदीप मुखिया नरोत्तम सिंह और सीताराम महतो समेत दर्जनों लोगों ने कहा कि टीपी सिंह हमेशा समाज को जोड़ने और सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की राजनीति करते थे। उनका मानना है कि आज उनके नाम पर जातीय और राजनीतिक लाभ लेने का प्रयास किया जा रहा है।
समर्थकों ने सवाल उठाया कि टीपी सिंह की जन्मभूमि बिंद प्रखंड का गाजीपुर गांव और कर्मभूमि बिहारशरीफ रही है, फिर भी शहादत दिवस का आयोजन अस्थावां में किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कार्यक्रम में स्थानीय विधायक, सांसद और अन्य प्रमुख जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित नहीं किया गया, जबकि कुछ बाहरी नेताओं को बुलाकर राजनीतिक संदेश देने की कोशिश की जा रही है।
समर्थकों का कहना है कि टीपी सिंह की हत्या के मामले में न्याय दिलाने में विफल रहे लोग आज उनके नाम पर सहानुभूति बटोरने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने साफ कहा कि टीपी सिंह जाति नहीं, बल्कि समाज और जमात की राजनीति करते थे, इसलिए उनके नाम का राजनीतिक इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जाएगा।
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