प्रधानमंत्री बनने के बाद 3156 दिनों के बाद 19 जून को दोबारा नरेन्द्र मोदी नालंदा आएंगे

DNB Bharat Desk

 

राजगीर में वैभारगिरि की तलछटी के 455 एकड़ में 1,749 करोड़ से नवनिर्मित भवन का उद्घाटन करेंगे, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नालंदा दौरे को लेकर एसपीजी ने संभाला मोर्चा

डीएनबी भारत डेस्क

नालंदा विश्वविद्यालय राजगीर और प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के संभावित दौरे को लेकर एसपीजी ने दोनों स्थलों पर अपनी कमान संभाल ली और आज प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान प्रधानमंत्री के आगमन को लेकर नालंदा विश्वविद्यालय परिसर में एसपीजी द्वारा उच्च अधिकारियों के साथ एक विशेष बैठक भी की। बैठक के दौरान सुरक्षा को ध्यान में रखते हुये हर पहलुओं पर विचार विमर्श किया गया।

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प्रधानमंत्री बनने के बाद 3156 दिनों के बाद 19 जून को दोबारा नरेन्द्र मोदी नालंदा आएंगे 2कार्यक्रम के सफल संचालन को लेकर कई आवश्यक निर्देश भी दिये गये। मालूम हो कि आगामी 19 जून को यानी भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नालंदा विश्वविद्यालय के नेट जीरो परिसर का शुभारंभ करेंगे जो 455 एकड़ में 1749 करोड़ की लागत से बनकर तैयार है। साथ हीं प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय के भग्नावशेष का अवलोकन भी करेंगे। इस दौरान प्रधानमंत्री नालंदा विश्वविद्यालय परिसर में पौधारोपण करेंगे।

प्रधानमंत्री बनने के बाद 3156 दिनों के बाद 19 जून को दोबारा नरेन्द्र मोदी नालंदा आएंगे 3प्रधानमंत्री के साथ भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर, बिहार के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, नालंदा विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अरविन्द पनगढ़िया भी मौजूद रहेंगे। इस दौरान नालंदा विश्वविद्यालय के स्थापना में अहम योगदान देने वाले कुल 17 देशों के राजदूत भी शामिल होंगे। इस दौरान अध्ययन कर रहें कई देशों के छात्र-छात्रा भी मौजूद रहेंगे।  कुलपति प्रो अभय कुमार सिंह ने बताया कि भारत को विश्व गुरू बनाने का जो हमारा लक्ष्य है उसके प्रति एक और बढ़ता कदम है।

प्रधानमंत्री बनने के बाद 3156 दिनों के बाद 19 जून को दोबारा नरेन्द्र मोदी नालंदा आएंगे 4उन्होने कहा कि नालंदा विश्वविद्यलाय की स्थापना से नालंदा का गौरवशाली अतीत था उसे पुर्नजीवित करने का प्रयास किया गया है। इस परिसर में विगत सत्र में 26 देशों के बच्चे अध्ययन कर रहें थे। जिनमें उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका के देशों में पेरू, चिली, अर्जेटीना, ब्राजील अफ्रीकी देशो, दक्षिण एशिया के म्यांमार, कंबोडिया, लाओस, इंडोनेशिया, मध्य एशिया के तुर्की के बच्चे भी पढ़ते है। यह पवित्र भूमि है। शांति, ज्ञान की भूमि हैं।

डीएनबी भारत डेस्क

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