वीरपुर: 17 अक्टूबर को होगा जगरणा, देर शाम दर्शन के लिए खुलेंगे मां शेरावाली के पट

DNB Bharat Desk

शारदीय नवरात्र का वेदों, पुराणों और पंचांगों में विद्वान पंडितों एवं ऋषियों-महर्षियों द्वारा विशेष महत्व बताया गया है। साथ ही इस पावन अवधि में किए जाने वाले विभिन्न व्रतों के नियम और शास्त्रीय विधान भी विस्तार से वर्णित हैं।

 पंचांगों के अनुसार इस बार मां दुर्गा का पूजन विशेष योगों में संपन्न हो रहा है। लोक परंपरा में श्रद्धालु सप्तमी तिथि को मां दुर्गा तथा अपने-अपने घरों में कुलदेवियों की विशेष पूजा-अर्चना करते हैं, जिसे पंचांग और शास्त्रों में ‘पत्रिका प्रवेश’ तथा ‘सरस्वती आह्वान’ के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष यह शुभ तिथि 17 अक्टूबर, शनिवार को पड़ रही है।

​वीरपुर: 17 अक्टूबर को होगा जगरणा, देर शाम दर्शन के लिए खुलेंगे मां शेरावाली के पट 2जगरणा (निशा पूजा/जागरण) को लेकर विद्वानों ने स्पष्ट शास्त्रीय प्रमाण प्रस्तुत किए हैं। शास्त्रों में वर्णित सूत्र ‘मूले त्वावाहयिष्यामि’ के अनुसार मूल नक्षत्र में देवी के आह्वान का विधान 17 अक्टूबर, शनिवार को ही शास्त्रसम्मत बैठता है। इसके अतिरिक्त ऋषियों-महर्षियों द्वारा प्रतिपादित त्रि-देवी उपासना क्रम—जिसके अंतर्गत तीन दिन महाकाली, तीन दिन महालक्ष्मी और अंतिम तीन दिन महासरस्वती की आराधना की जाती है—के आधार पर भी 17 अक्टूबर को ही सरस्वती आह्वान का योग बन रहा है।

वहीं, स्थानीय पूर्वजों और विद्वान पंडितों की लोक परंपरा ‘सप्तमी को जगरणा व खरना, तब अष्टमी को अष्टमी व्रत’ के अनुसार भी 17 अक्टूबर को ही जगरणा और देर शाम मां शेरावाली के पट दर्शनार्थ खोलना सर्वमान्य व शास्त्रसम्मत है।

बेगूसराय वीरपुर संवाददाता गोपल्लव झा की रिपोर्ट

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