आयुष्मान आरोग्य मंदिर बछवाड़ा में मना 11वां आयुर्वेद दिवस, एलोपैथी के दुष्प्रभावों पर वक्ताओं ने जताई चिंता

DNB Bharat Desk

डीएनबी भारत डेस्क

बछवाड़ा प्रखंड परिसर स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर अझौर संप्रति स्वास्थ्य केंद्र बछवाड़ा में बुधवार को आयुर्वेद दिवस के अवसर पर 11वें एक दिवसीय जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संयुक्त उद्घाटन प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुजीत कुमार, आयुष चिकित्सक डॉ. अरविंद कुमार, आत्मा के एटीएम अरविंद कुमार सिंह, फार्मासिस्ट संजय कुमार पांडेय एवं पंकज कुमार परिमल ने किया।

शिविर को संबोधित करते हुए प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. सुजीत कुमार ने कहा कि प्रतिवर्ष आयुर्वेद दिवस मनाने का मुख्य उद्देश्य लोगों को अपनी प्राचीन चिकित्सा पद्धति के प्रति जागरूक करना है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज लोग एलोपैथिक दवाओं पर अत्यधिक निर्भर हो चुके हैं, जिसके दुष्प्रभावों से नई-नई बीमारियां जन्म ले रही हैं। लंबे समय तक दवा खाने के बाद भी जब बीमारी का स्थायी समाधान नहीं निकलता, तब लोग थक-हारकर अंत में आयुर्वेद की शरण में जाते हैं, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी होती है।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर बछवाड़ा में मना 11वां आयुर्वेद दिवस, एलोपैथी के दुष्प्रभावों पर वक्ताओं ने जताई चिंता 2उन्होंने आगे कहा कि आयुर्वेद वेदों से निकली हमारी अनमोल धरोहर है, जिसे आज पूरी दुनिया अपना रही है। विडंबना यह है कि हम अपनी ही पद्धति को छोड़कर विदेशों से आई अंग्रेजी दवाओं के पीछे भाग रहे हैं। यह स्थिति उस कस्तूरी मृग जैसी है, जिसकी नाभि में कस्तूरी होती है लेकिन वह उसकी तलाश में दर-दर भटकता रहता है। यदि हम अपनी दिनचर्या में आयुर्वेद को शामिल कर लें, तो कम खर्च में तन-मन से स्वस्थ रहते हुए अपने पूर्वजों की तरह दीर्घायु जीवन जी सकते हैं। वहीं आत्मा के एटीएम अरविंद कुमार सिंह ने स्वास्थ्य और कृषि के सीधे संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि आज हम दवाओं के साथ-साथ खेती में भी जहरीले रसायनों और कीटनाशकों का अंधाधुंध प्रयोग कर रहे हैं, जिससे बीमारियां बढ़ रही हैं।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर बछवाड़ा में मना 11वां आयुर्वेद दिवस, एलोपैथी के दुष्प्रभावों पर वक्ताओं ने जताई चिंता 3पूर्व समय में छोटे बच्चों को सुहागा और जायफल दिया जाता था, बुखार में हरसिंगार के पत्तों का काढ़ा और गैस-अपच की समस्या में अजवाइन व काले नमक का घरेलू उपचार कारगर साबित होता था। इसी तरह खेती में भी रासायनिक खादों के स्थान पर गोबर की खाद और कीट नियंत्रण के लिए चूल्हे की राख का उपयोग किया जाता था। उन्होंने कहा कि बेमौसम और रासायनिक रूप से चमकाई गई सब्जियां स्वास्थ्य के लिए धीमा जहर साबित हो रही हैं। आयुर्वेद की वास्तविक ताकत कोरोना महामारी के दौरान स्पष्ट रूप से देखी गई, जब हल्दी, तुलसी, दालचीनी, काली मिर्च, गुड़ और नीबू से बने काढ़े ने दुनिया भर में लोगों की जान बचाई।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर बछवाड़ा में मना 11वां आयुर्वेद दिवस, एलोपैथी के दुष्प्रभावों पर वक्ताओं ने जताई चिंता 4उन्होंने आमजन से अपील की कि वे स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए आयुर्वेद तथा खेत व मिट्टी की सेहत के लिए जैविक खेती को बढ़ावा दें। कार्यक्रम के दौरान मौके पर मनोज कुमार शर्मा, राम कुमार चौधरी, सागर कुंवर, राम प्रवेश राय, सुखदेव रजक, प्रमिला देवी, रचना कुमारी, दिनेश साह सहित बड़ी संख्या में स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।

बेगूसराय बछवाड़ा संवाददाता मनोज कुमार राहुल की रिपोर्ट

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