नालंदा:करोड़ो रूपये की लागत से सुविधाओ से लैस बीड़ी मजदूरों अस्पताल बना भूतबंगला 

DNB Bharat Desk

एक तरफ सरकार द्वारा मिशन 60 के तहत लाखों करोड़ों रुपए स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए खर्च किए गए, वही बीड़ी अस्पताल केंद्र सरकार और राज्य सरकार की नजरों से दूर रहा।

डीएनबी भारत डेस्क

नालंदा जिला का एकमात्र श्रमिक सरकारी बीड़ी अस्पताल इन दिनों बदहाली के दौर से गुजर रहा है। वर्ष 2004 में 12 करोड़ की लागत से श्रमिकों के बेहतर इलाज के लिए सभी सुविधाओं से लैस बीड़ी अस्पताल का उद्घाटन किया गया था। आज 19 वर्षों में ये अस्पताल एक डरावनी हवेली बन चुकी है। अस्पताल परिसर में चारों ओर सिर्फ जंगल ही जंगल नजर आता है।

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नालंदा:करोड़ो रूपये की लागत से सुविधाओ से लैस बीड़ी मजदूरों अस्पताल बना भूतबंगला  2अस्पताल परिसर में सभी कमरे के कांच खिड़की टूटे हुए हैं।अस्पताल में मरीजों के सुविधा के लिए लगाया गया लिफ्ट बंद पड़ा है लिफ्ट के अंदर के ज्यादातर यंत्र गायब है। आए दिन चोर द्वारा चोरी की घटना को अंजाम दिया जा रहा है।

नालंदा:करोड़ो रूपये की लागत से सुविधाओ से लैस बीड़ी मजदूरों अस्पताल बना भूतबंगला  3अस्पताल के मुख्य चिकित्सक डॉ प्रियतोष कुमार दास के अनुसार इस अस्पताल में अब तक 5 से 6 बार चोरी की घटना घट चुका है। दरअसल ये बीड़ी अस्पताल श्रम संसाधन विभाग के अंतर्गत आता है। श्री दास ने बताया कि कई बार अस्पताल के व्यवस्था और रखरखाव के लिए वरीय अधिकारियों को शिकायत की गई है, लेकिन कहीं से भी कोई जवाब नहीं आया है। कुछ दिन पहले भी पटना से एक टीम आई, उन्होंने स्थितियों को देखा, लेकिन उसके बावजूद अब तक इसके विकास को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं।

नालंदा:करोड़ो रूपये की लागत से सुविधाओ से लैस बीड़ी मजदूरों अस्पताल बना भूतबंगला  4अस्पताल में जितने भी उपकरण हैं, सभी टूटे-बिखरे हुए हैं। कुछ गायब हैं, तो कुछ उपकरणों को जंग खा रही है। अस्पताल में ओपीडी सेवा चल रही है, लेकिन महिला डॉक्टर और सर्जन नहीं हैं।

नालंदा:करोड़ो रूपये की लागत से सुविधाओ से लैस बीड़ी मजदूरों अस्पताल बना भूतबंगला  5अस्पताल में मौजूद स्वास्थ्यकर्मी ने बताया कि फिलहाल यहां ओपीडी सेवा चल रही है। रोजाना 20 से 25 मरीज यहां आते हैं। लेकिन यहां महिला डॉक्टर नहीं है और ना ही कोई सर्जन डॉक्टर है। ऐसे परिस्थितियों में कोई महिला मरीज या सर्जरी से जुड़े मरीज आते हैं, तो उन्हें सदर अस्पताल बिहारशरीफ रेफर कर दिया जाता है। फिलहाल यहां दो डॉक्टर चार सिस्टम एक लैब एक एक-रे एक गार्ड और दो आया के सहारे वीडियो समेत अस्पताल चल रहा है। इंडोर सेवा पिछले छः सालो से बंद है।

नालंदा:करोड़ो रूपये की लागत से सुविधाओ से लैस बीड़ी मजदूरों अस्पताल बना भूतबंगला  6अस्पताल में मौजूद चिकित्सक ने बताया कि जिले में कोरोना के समय में कई निजी व सरकारी जगहों को चयनित कर आइसोलेशन केंद्र बनाया गया था। कोरोना काल समाप्त होने के बाद अन्य सभी आइसोलेशन केंद्र अब सुचारू रूप से उत्तम व्यवस्था के साथ चल रहा है। लेकिन जिले का ये इकलौता ऐसा अस्पताल है, जहां सुविधाओं की कमी नहीं है। लेकिन रखरखाव में अनदेखी और लापरवाही से आज ये पूरा अस्पताल भूत बंगला बन चुका है।

नालंदा:करोड़ो रूपये की लागत से सुविधाओ से लैस बीड़ी मजदूरों अस्पताल बना भूतबंगला  7जहां एक तरफ सरकार द्वारा मिशन 60 के तहत लाखों करोड़ों रुपए स्वास्थ्य व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए खर्च किए गए, वही बीड़ी अस्पताल केंद्र सरकार और राज्य सरकार की नजरों से दूर रहा, जिसका नतीजा ये है कि भव्य भवन होने के बावजूद इसका सही उपयोग नहीं किया जा रहा है। अपराधियों व नशेड़ियों का अड्डा बनता जा रहा है।

नालंदा:करोड़ो रूपये की लागत से सुविधाओ से लैस बीड़ी मजदूरों अस्पताल बना भूतबंगला  8यह मामला केंद्र सरकार की अनदेखी और लापरवाही का एक उदाहरण है। सरकार को चाहिए कि वह इस अस्पताल का जल्द से जल्द जीर्णोद्धार कराए और इसे श्रमिकों के लिए सुलभ बनाए। साथ ही यहां के स्थानीय पुलिस को इस अस्पताल में चोरी और नशेड़ियों के उत्पात पर अंकुश लगाने की आवश्यकता है।

 

नालंदा से ऋषिकेश की रिपोर्ट

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